मंगलवार, जनवरी 30, 2018

Technology से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (interesting Facts) जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे





  • Top 10 Interesting Technology Facts in Hindi


दोस्तों आप इंटरनेट या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो बहुत करते होंगे। सभी करते हैं, में भी करता हूँ। टेक्नोलॉजी ओर इंटरनेट आज के दौर में सभी की जिन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। चाहे वो एक Blogger हो, Youtuber हो या कोई सामान्य इंटरनेट यूजर, टेक्नोलॉजी सभी के लिए अहम हो चुकी है।


लेकिन दोस्तों, टेक्नोलॉजी( Technology) ओर इंटरनेट से संबंधित ऐसे बहुत से( interesting facts) रोचक तथ्य हैं, जिनके बारे में शायद ही आप सब जानते होंगे। भले ही आप इंटरनेट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं या इसके बारे में बहुत सारी जानकारी रखते हैं, लेकिन फिर भी ऐसे बहुत से तथ्य है, जो जो शायद आपकी जानकारी में नही होंगे ओर आज को इस पोस्ट में हम आपको इन्ही के बारे में बताने वाले हैं।


आज आप जैसी टेक्नोलॉजी देख रहे हैं, वैसी पहले नहीं थी। अगर टेक्नोलॉजी के शुरुआती दिनों पर निगाह डालेंगे तो पता लगेगा कि किस तरह लोगों ने जुनून से इसे मौजूद रूप तक पहुंचाया। तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं और जानते हैं टेक्नोलॉजी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे :-



Technology से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Interesting Technology Facts) हिन्दी में





वर्ल्ड वाइड वेब से पहले भी मौजूद था ईमेल


कुछ सालों पहले ऐसा तक इमेल मौजूद स्वरूप जैसा नहीं था। आप YouTube पर रोचक क्लिप "How to send an Email Database-1983" देख सकते है। इसमें ईमेल भेजने का तरीका बताया है। माइक्रो नेट सर्विस से कनेक्ट होने के लिए कंप्यूटर और रोटरी टेलीफोन कि जरूरत पड़ती थी। यह वर्ल्ड वाइड वेब से पहले का समय था। उस समय URL नहीं था, सिर्फ नंबर बेस्ट वेब पेज थे। ईमेल के लिए वेब पेज नंबर 7776 था।

क्वर्टी लेआउट (Querty layout) कीबोर्ड आपको धीमा करने के लिए बनाया था


इससे जुड़े दो सिद्धांत हैं।
पहला सिद्धांत👉 तब समझ में आता है जब आप मैनुअल टाइपराइटर देखते हैं। अगर कोई बहुत तेज टाइप करेगा तो कीज जाम हो जाएंगी। क्वर्टी कीबोर्ड सामान्य अल्फाबेट्स को एक दूसरे से दूर रखता है, और टाइपिस्ट को धीमा बनाता है। आज के दौर में क्वर्टी कीबोर्ड को फास्ट टाइपिंग का माध्यम समझ आ जाता है।

दूसरा सिद्धांत 👉 है कि टेलीग्राफ ऑपरेटर्स ने क्वर्टी लेआउट डिजाइन किया, क्योंकि यह मोर्स कोड को समझने में आसान बनाता है। इसके सिवाए कोई कारण नहीं है कि इस लेआउट को उस स्थिति में रखा जाए, लेकिन यह लेआउट अटका हुआ है और इसे बदलने का विरोध बना रहता है। लोगों को क्वर्टी कीबोर्ड की आदत पड़ चुकी है। अगर आप कीबोर्ड बदलना चाहते हैं तो लैंग्वेज सेटिंग में जाकर तेज डवर्क लेआउट अपना सकते हैं या नया डवर्क कीबोर्ड ले सकते हैं।

Font बदलने से प्रिंटर इंक बच सकती है


यह सही है कि Font बदलने से प्रिंटर इंक बच सकती है। सभी Fonts एक जैसी नहीं बनी होती है। लोग अलग-अलग तरह की Font कोई कारण से बनाते हैं- इससे आप खास संदेश प्रसारित कर सकते हैं, सजावट कर सकते हैं और अपनी बात स्थापित कर सकते हैं। यदि लाइटर फोंट (लाइटर स्ट्रोक के साथ) इस्तेमाल करते हैं, तो प्रति पेज कम सही इस्तेमाल होती है। इंक टैंक और टोनर आधारित लेजर प्रिंटर की बात छोड़ दें और मान लिया जाए कि सिर्फ इंकजेट प्रिंटर्स से प्रिंटिंग कर रहे हैं तो लाइटर फॉन्ट का इस्तेमाल करके आप 10 फ़ीसदी स्याही की बचत कर सकते हैं।


दुनिया की 92% मुद्रा डिजिटल है


इसका अर्थ यह है कि आप जो मुद्रा कमाते आते हैं, कारोबार करते हैं और सामान या सर्विस खरीदने में इस्तेमाल करते हैं वह सिर्फ कंप्यूटर्स और हार्ड ड्राइव पर मौजूद है। केवल 8 फ़ीसदी वैश्विक मुद्रा फिजिकल मुद्रा है। हर तरह की ब्लैक मनी इस 8 फ़ीसदी में शामिल है। यह आंकड़े देखकर आप सोच सकते हैं कि यह बेतुके हैं, पर यदि सही तरह से विचार करेंगे तो पाएंगे कि ज्यादातर बड़े ट्रांजैक्शन इलेक्ट्रोनिकली किए जाते हैं। बैंक भी मुद्रा को इलेक्ट्रॉनिकली सुरक्षित रखते हैं। इस 92 फ़ीसदी में डेबिट/क्रेडिट कार्ड और वायर ट्रांसफर द्वारा किए गए हर तरह के ट्रांजैक्शन शामिल है।

1995 तक डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन मुफ्त थे


उस समय किसी को भी पता नहीं था कि इंटरनेट किस तरह से दुनिया बदल सकता है। शुरू में लोगों के पास हर तरह के डोमेन नेम का अधिकार प्राप्त करने का मौका था। 1995 में नेटवर्क सॉल्यूशंस कंपनी को डोमेन नेम के लिए लोगों से राशि लेने का अधिकार दिया गया। यह महंगा भी था। आमतौर पर 2 वर्ष के रजिस्ट्रेशन के लिए 100 डॉलर से शुरुआत होती थी। इस राशि का 30 फ़ीसदी हिस्सा नेशनल साइंस फाउंडेशन को 'इंटरनेट इंटेलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' बनाने के लिए जाता था। इस फीस को वर्ष 1997 में बदला गया और 2 वर्ष के रजिस्ट्रेशन के लिए $70 की राशि ली जाने लगी।

रूस ने 1936 में पानी पर चलने वाला कंप्यूटर बनाया


ट्रांजिस्टर्स के सूक्ष्म रूप में आने से पहले कंप्यूटर गणना के विजुअल सिस्टम की तरह नजर आते थे। इसमें लीवर, मोती और धूरियों का इस्तेमाल किया जाता था। इन्हें किसी ऊर्जा स्रोत की तरह होती थी। 1936 में व्लादिमीर लुक्यानोव ने इसी तरह का सिस्टम तैयार किया। उन्होंने कंप्यूटर तैयार करने के लिए पानी काम में लिया। लुक्यानोव कंप्यूटर की इमेजेज में पानी से भरी इंटरकनेक्टेड ट्यूब्स का कांपलेक्स सिस्टम दिखता है। टैप्स और प्लग्स को व्यवस्थित करके पानी के बहाव में बदलाव आता था। अंतिम परिणाम ट्यूब मैं पानी के स्तर को नाप कर पता किया जाता था। यह वाटर इंटीग्रेटेड था और कंक्रीट के तड़क जाने की समस्या को सुलझाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

1956 में 5 MB डाटा का वजन 1 टन होता था


वर्ष 1956 में IBM ने रामैक लॉन्च किया। यह हार्ड ड्राइव जैसी चीज के साथ पहला कंप्यूटर था। अब हार्ड ड्राइव का अर्थ ऐसी चीज से लगाया जाता है जिसमें मैग्नेटिक डिस्क इस्तेमाल की जाती है और उसे डेटा एक्सेस और राइट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पंच कार्ड और मैग्नेटिक टेप (जो डाटा को सीक्वेंस में स्टोर करते थे) से चलकर एक्सेसेबल हार्ड ड्राइव्स सबको पसंद आई। रामैक का अर्थ है- रैंडम एक्सेस मेथड ऑफ़ एकाउंटिंग एंड कंट्रोल। इस पूरे केबिनेट का वजन 10 किलोग्राम से ज्यादा था और 5 मेगाबाइट (MB) डाटा मैग्नेटिक आयरन ऑक्साइड से कोटेड 50 विशाल एल्युमीनियम डिस्क में मौजूद होता था। डिस्क 1200

आरपीएम (RPM) कि स्पीड में घूमती थी। मशीन 3200$ प्रति माह की दर से किराए पर मिलती थी।

1999 में 15 साल के किशोर ने नासा को हैक कर लिया


वर्ष 1999 के अगस्त और अक्टूबर के बीच में जोनाथन जेम्स ने अपनी स्किल्स का हैकर के तौर पर इस्तेमाल किया। उसने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के एक डिवीजन डिफेंस थ्रेट रिड्यूसन एजेंसी (DTRA) का डाटा बाधित कर दिया। उसने DTRA के एंप्लॉइज के 3000 से ज्यादा संदेशों, यूज़रनेम और पासवर्ड को एक्सेस कर लिया। उसने तापमान और नमी को कंट्रोल करने के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए सोर्स कोड प्राप्त कर लिया। नासा को 3 सप्ताह के लिए कंप्यूटर्स बंद करने पड़े। इस समस्या को दूर करने के लिए नासा को लगभग $41000 खर्च करने पड़े। 16 वर्ष का होने पर जोनाथन को सजा दी गई। उसने बता दिया कि कंप्यूटर के लिए उम्र मायने नहीं रखती।

बदमाशों से निपटने के लिए खास सॉफ्टवेयर की मदद


Wikipedia का मिशन है कि हर व्यक्ति को इंटरनेट एक्सेस के साथ मुफ्त में जानकारी मुहैया हो। इंटरनेट से कोई भी व्यक्ति साइन-अप करके उसके पेज एडिट कर सकता है। Wikipedia के लिए लगातार बदलाव पर निगाह रखना चुनौती साबित होता है। ऐसे में खास कंप्यूटर प्रोग्राम इस्तेमाल में लिए जाते हैं। क्लूबोट-एनजी जैसा कंप्यूटर प्रोग्राम किसी भी पेज में होने वाले बदलाव पर निगाह रखता है। अगर बदमाश चीजों में बदलाव की कोशिश करता है तो यह प्रोग्राम सही वर्जन पर तुरंत वापस ले जाता है। लगभग 1941 बोट (कंप्यूटर प्रोग्राम) 38,818,162 Wikipedia पेज पर इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत है।

एडवांस्ड ग्राफिंग कैलकुलेटर में ABC कीबोर्ड


स्मार्टफोन से से पहले एक ऐसा दौर था जब डिजिटल डायरीज और एडवांस्ड केलकुलेटर से मशहूर थे। इनसे साधारण डाटा स्टोर कर सकते थे और गणना पूर्ण कर सकते थे। इनसे स्टूडेंट्स एलजेब्रा और कैलकुलस समता के विभिन्न समीकरण हल कर सकते थे। उस दौर में एग्जाम हॉल में एडवांस्ड कैल्कुलेटर ले जाने की इजाजत थी। अगर आपके किसी डिवाइस में क्वर्टी कीबोर्ड नजर आता था तो उसे बैन कर दिया जाता था, क्योंकि वह कंप्यूटर की पारंपरिक भाषा में आता था। टेक्सास इंस्ट्रुमेंट्स ने इसके लिए अल्फाबेटिकल ले-आउट वाले कीबोर्ड का ग्राफिग कैलकुलेटर पेश किया।

आज की इस खाश पोस्ट "Technology से जुड़े कुछ खाश तथ्य (Interesting Facts)" में बस इतना ही। ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए जुड़े रहिये Geekyrohit.com के साथ। धन्यवाद।

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